शनिदेव के वाहन

सभी देवताओं के सामान्य रूप से एक-एक वाहन है, लेकिन शनिदेव के सात अलग-अलग वाहन हैं। शनिदेव का सबसे प्रमुख वाहन गिद्ध है । दूसरा वाहन यमराज के भाई होने के नाते भैसा है । इनके अतिरिक्त हाथी, गर्दभ अर्थात् गधा, श्वान, मृग और सिंह भी शनिदेव के वाहन है। शनिदेव जिस वाह्न पर सवार होकर व्यक्ति के पास आते हैं उसी वाहन के अनुरूप फल प्रदान करते हैं ।
गिद्ध पर सवार शनिदेव अपना सामान्य प्रभाव ही दिखलाते हैं। जिस प्रकार गिद्ध केवल मरे हुए जानवरों को ही अपना भोजन बनाता है, उसी प्रकार शनिदेव भी पाप में लिप्त प्राणियों को ही दण्ड देते हैं। गिद्ध की दृष्टि के तरह ही पृथ्वी से इतनी दूर होने पर भी, शनिदेव पृथ्वी के प्राणियों को उनके कर्म के अनुसार फल प्रदान करते हैं।

Shani Vahan

शनिदेव के चरण :-

शास्त्रों के अनुसार शनिदेव के चार चरण हैं। जब किसी व्यक्ति की जन्म-कुण्डली में शनिदेव लोहे के पांवों आते हैं, तब भांति-भांति से हानि का कारण बनते हैं। तांबे के पांवों आना सामान्य प्रभाव देता है, तो चांदी के पांवों आना शुभ और कल्याणकारी है। परंतु शनिदेव का सोने के पांव आना तो मनुष्य को राजा ही बना देता है। शनिदेव अपने भक्तों पर हमेशा अनुग्रह बनाए रखते हैं ।