॥ अथ नवग्रह स्तोत्र ॥ (Navgrah Stotra)

Navgrah Strotra

पलाश के पुष्प की भाँति जिनकी लाल दीप्ति है, जो समस्ततारागणों में श्रेष्ठ माने जाते हैं तथा जो सवयं रौद्र रूप व रौद्रात्मक है, ऐसे घोर पापरूपी केतु को मैं प्रणाम करता हूँ ।

Navgrah Strotra

व्यास जी के मुख से निकले हुए इस स्तोत्र का जो सावधानीपूर्वक दिवस अथवा रात्रि के समय पाठ करता है , उसके सम्पूर्ण विघ्न-बाधायें शान्त हो जाती हैं ।