॥ अथ नवग्रह स्तोत्र ॥ (Navgrah Stotra)

Navgrah Strotra

जिनकी दीप्ति नील अञ्जन के समान है, जो सुर्य के पुत्र तथा यमराज के अग्रज हैं, सुर्य की छाया से जो उत्पन्न हुए हैं, मैं उन शनैश्चर देवता को भी प्रणाम करता हूँ ।

Navgrah Strotra

जिनका केवल आधा शरीर है तथा जिनमें महान् पराक्रम है और जो चंद्र तथा सुर्य को भी परास्त कर देते हैं, जिनकी उत्पत्ति सिहिंका के गर्भ से हुई है, मैं उन राहु देवता को प्रणाम करता हूँ ।