॥ अथ नवग्रह स्तोत्र ॥ (Navgrah Stotra)

Navgrah Strotra

देवताओं और ऋषियों के जो गुरु हैं, कञ्चन की भाँति जिनकी प्रभा है, जो बुद्धि के असीम भण्डार तथा तीनों लोकों के स्वामी हैं, मैं उन बृहस्पति जी को प्रणाम करता हूँ ।

Navgrah Strotra

तुषार , कुन्द या मृणाल की भाँति जिनकी आभा है, दैत्यों के जो परम गुरु हैं , मैं उन सभी शास्त्रों के अद्वीतीय वक्ता शुक्राचार्यजी को प्रणाम करता हूँ ।